पुण्य तिथि : 26 सितम्बर 1983
आदरणीय प्रेमी श्री राम लाल जी की पुण्य तिथि पर उनको शत शत नमन है। प्रेमी राम लाल जी का जन्म 1918 में मटौर जिला रावलपिंडी पाकिस्तान पंजाब में हुआ। श्री महाराज जी के दर्शन भी उन्हें पाकिस्तान में ही हुए। सन 1936 में उन्हें देश की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और फ़ौज में भर्ती हो गए। सन 1940 या 1941 के आसपास की बात है कि भारतीय फौज के आदेश अनुसार द्वितीय विश्वयुद्ध में श्रीलंका जाने का आदेश हुआ। जाने से पहले उनकी मुलाक़ात श्री सत गुरुदेव जी से हुई और इसी दौरान उन्हें सत शिक्षा प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
प्रेमी जी के सुपुत्र श्री चमन जी बताते हैं कि देश के विभाजन के बाद वे परिवार सहित गांव सुभाष गढ़, हरिद्वार में रहने लगे। वे कहते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए श्री रामलाल जी का सुबह और शाम का सिमरन का नियम दृढ़ था। उनके अनुसार प्रेमी जी फ़ौज में युद्ध जैसी गंभीर स्थिति में भी ईश्वर को याद करना नहीं भूलते थे। श्री चमन जी अपनी माता श्रीमती प्रकाश देवी के साथ जगाधरी सम्मेलन में अवश्य शामिल होते थे। यह सत शिक्षा का ही प्रभाव था जब श्रीमती प्रकाश देवी जी का निधन हुआ उस समय उनके नेत्रदान किए गए थे एवं अंतिम क्रिया समता नीति अनुसार की गई थी।
श्री राम लाल जी के सुपुत्र आज भी इसी समाज सेवा को सर्वोपरि मानते हुए जहां कहीं भी कोई जरूरतमंद हो उसकी सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। रेड क्रॉस जैसी समाजिक संगठनों में सक्रिय भागीदारी रखते हुए सेवा के नियम को दृढ़ता से पालन कर रहे हैं।