पुण्य तिथि : 21 नवम्बर 2009
प्रभ अपने से मांगयो , गुरमुखता तत्त सार ।
चार पदारथ तिसमें , ‘मंगत’ कहे पुकार ।।
कम आयु में ही आपने सच्चे संस्कारों को अपनाया और जीवनपर्यंत संगत सेवा में लगे रहे। सतगुरुदेव जी का अनमोल सानिध्य प्राप्त हुआ और उनकी अपरम अपार कृपा से कम आयु में ही आपको दीक्षा भी प्राप्त हुई।
आपने अम्बाला एवं जगाधरी संगत से गहरा जुड़ाव रखते हुए, साप्ताहिक, मासिक व वार्षिक समता सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
आपका जीवन निष्काम सेवा, विनम्रता, त्याग और समर्पण की मिसाल रहा है। आज भी आपके परिवार के सभी सदस्य आध्यात्मिक एवं समता शिक्षा में रुचि रखते हैं और निष्काम भाव से संगत सेवा में समर्पित हैं। आपके सुपुत्र प्रेमी शाम थापर जी सपरिवार सहित निष्काम सेवा भाव से आज भी समता शिक्षा को पूर्णतः समर्पित हैं और नियमित रूप से विभिन्न संगतों के साप्ताहिक, मासिक एवं वार्षिक सम्मेलन एवं सभी सेवा कार्यों में भाग लेने का भरपूर प्रयास करते हैं।
आज आपकी पुण्यतिथि पर हम सब आपको याद कर, आपकी अटूट सेवा को शत शत नमन करते हैं और सतगुरदेव जी से सत विश्वास, सत बुद्धि व ईश्वर प्रेम प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं ताकि हम सब भी सेवा रूपी अमोलक धन को अपने जीवन में एकत्रित करने का भरपूर प्रयास कर सकें।
श्री सतगुरुदेव जी के आशीर्वाद से संगत समतावाद ट्रस्ट, हरिद्वार के सभी सदस्य बजुर्गों के सच्चे जीवन से इसी प्रकार प्रेरणा लेते रहेंगे और उनके त्याग, सेवा और आस्था को शत् शत् नमन करते हुए भविष्य में भी यह श्रद्धांजलि सेवा कार्य सतगुरुदेव जी के आशीर्वाद से जारी रखेंगें ।