पुण्य तिथि : 26 नवंबर 1990
प्रभ अपने से मांगयो , गुरमुखता तत्त सार ।
चार पदारथ तिसमें , ‘मंगत’ कहे पुकार ।।
श्री सतगुरुदेव महात्मा मंगतराम जी द्वारा दीक्षित प्रेमी श्री ज्योति राम ओबरॉय जी आज ही के दिन 26 नवंबर सन 1990 में इस नश्वर शरीर का त्याग कर अपनी जिंदगी के अगले सफर पर आगे बढ़े।
आदरणीय प्रेमी जी का जन्म 1 जनवरी 1903 गांव शैलदिता जिला रावलपिंडी में हुआ। विभाजन के बाद अंबाला शहर में आकर परिवार सहित रहने लगे।अंबाला शहर में “रावलपिंडी वालों की कपड़े की दुकान” से लगभग सभी आपको जानते थे। आपके पौत्र श्री संजय ओबेरॉय जी से बातचीत के दौरान यह जानकारी हासिल हुई की आपको सत ग्रंथों के अध्ययन में अधिक रूचि थी। वे अक्सर मुझे रामायण पढ़ने के लिए कहते तो मैं उन्हें पढ़ कर सुनाया करता था। 1951 में जब सतगुरुदेव जी अंबाला पधारे तो आपको उनसे सत शिक्षा प्राप्त हुई। गुरुदेव से दीक्षा लेने के पश्चात आपने समता की तालीम को अपने जीवन में अपनाने का दृढ़ निश्चय किया और उसका पालन भी किया। आपके परिवार में रोज़ सत्संग होता और नजदीक कहीं भी समता सत्संग के प्रोग्राम का पता चलता तो उसमें अवश्य शामिल हुआ करते थे।
प्रेमी ज्योति राम ओबेरॉय जी के पुत्र श्री सोम प्रकाश ओबेरॉय जी फर्माते हैं की हम छोटी उम्र से ही पिताजी के साथ श्री महाराज जी के दर्शन के लिए जाया करते थे। श्री महाराज जी अंबाला में एक दफा लब्बू के तालाब के पास आकर रूके। वहीं पर पिताजी की गुरुदेव से पहली भेंट हुई थी और सत शिक्षा प्राप्त हुई थी। रात को उस जगह पर रोज सतसंग होता जिसमें हम परिवार सहित पिताजी के साथ शामिल होते। श्री महाराज जी प्रवचन सुनाया करते थे और उसके बाद कुछ प्रश्न उत्तर हुआ करते थे। दास को जागधरी आश्रम में भी गुरुदेव के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इसका विशेष नतीजा यह रहा की आपके एक सुपुत्र श्री वेद प्रकाश ओबरॉय जी तमाम उम्र संगत की सेवा में तत्पर रहे। परिवार के अनुसार वेद जी 6-7 साल तक हरिद्वार देहरादून आदि धार्मिक स्थान पर काफी भ्रमण करते रहे परंतु गुरुदेव से मिलने के पश्चात और उनका सतसंग सुनने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
संगत समतावाद प्रबंधन का कार्यभार संभालते हुए श्री वेद प्रकाश ओबरॉय जी ने अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा प्रेम और सादगी से निभाई। समता की तालीम के प्रचार प्रसार में भी श्री वेद प्रकाश जी सदैव तत्पर रहते और गुरुदेव की शिक्षाओं को वाणी एवं वचनों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जहां कहीं भी समता सत्संग होता उसमें अवश्य शामिल होते।
आपका समस्त परिवार आज भी संगत समतावाद के साथ जुड़ा हुआ है और सतगुरुदेव महात्मा मंगतराम जी की शिक्षाओं पर अमल करते हुए आध्यात्मिक सफर पर हैं।
आइए, हम सब आदरणीय प्रेमी ज्योति राम ओबेरॉय जी की सच्ची सेवा, श्रद्धा, समर्पण और गुरुदेव के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को शत-शत नमन करें।उनका जीवन हमें प्रेरणा देता है कि हम भी गुरुदेव के बताए मार्ग सादगी, सत्य, सेवा, सत्संग और सतसिमरन पर चलते हुए अपने जीवन को सफल बनाएं।