आशीर्वाद पहुँचे! पत्र मिला, ईश्वर सत् बुद्धि देवे। तमाम संगत को एक-एक करके आशीर्वाद कहनी। तमाम परिवार को आशीर्वाद कहनी। ईश्वर सत् अनुराग देवे। प्रेमी जी वाजय (ज्ञात) होवे कि ज़िन्दगी का कमाल एक प्रभु परायण होने से प्राप्त होता है। संसार में कई प्रकार की मानसिक लहरें उत्पन्न होती हैं मगर समय पर सब लय हो जाती हैं। इस वास्ते एक ईश्वरीय नियम की जो लहर है और हर ज़माने में हरएक जीव के वास्ते कल्याणकारी है उस पर दृढ़ निश्चय से कारबन्द होना (अमल करना) अपनी कल्याण और देश की कल्याण भी है, इस वास्ते ज़रूरी अभ्यास किया करें और सत्संग का प्रोग्राम भी दृढ़ रखें। पत्रिका लिखते रहा करें। पवित्र ज़िन्दगी तुम्हारी देखना चाहते हैं। ज़माने की हरकत दिन व दिन गिरावट की ओर जा रही है, इस वास्ते अपने आपको समता के असूलों द्वारा बचाओ और दूसरों के मुहाफिज़ (रक्षक) बनो। ईश्वर गुरुवचन का विश्वास देवें। अपनी वापसी राय लिखनी कि सालाना (वार्षिक) सम्मेलन जो गंगोठियाँ होता है वह होना चाहिये, क्या तुम्हारी हाजरी होवेगी? तमाम संगत का भाव पूछकर जल्दी पता देना क्योकि और जगह के प्रेमी इसके मुतालिक (विषय) पूछ रहे हैं। अपनी संगत का पता देना जरूरी। ईश्वर सत् अनुराग और सत् परायणता देखें।
(समयाला २१.७.४६)