आशीर्वाद पहुँचे। पत्र मिला, ईश्वर सत बुद्धि देवे। प्रेमी जी, इस संसार में हर एक जीव अपनी बुद्धि अनुसार विचर रहा है। कोई संसार में फैलाव फैलाकर असली खुशी चाहता है। कोई खास शुद्ध विचार वाला ही त्याग के मार्ग को समझकर असली निर्वाण शान्ति को प्राप्त होता है। इस वास्ते इस ज़िन्दगी के भेद को सही समझना ही कठिन है। फिर अमल करना उससे भी कठिन है। जब सही मायनों में आत्म विश्वास को जो प्राप्त होता है तब ही परम शान्ति को समझ सकता है। हर वक्त सत्य की खोज करनी और दुनियाँ की तबदीली को दृढ़ निश्चय से जानना ही परम शान्ति के देने वाला बोध है। ईश्वर ऐसा निर्मल विश्वास देवे ताकि अपनी जिंदगी को सही समझ सकें और बना सकें। अपनी कुशल पत्रका लिखते रहा करें। हर वक्त गुरु बचन विश्वास दृढ़ करें, इसमें परम कल्याण है।