तमाम संगत को आशीर्वाद कहनी एक-एक करके। हर वक्त प्रभु परायण होकर संकट का मुकाबला करें। प्रभु सत् शान्ति देवेंगे। प्रेमी मूलराजजी को आशीर्वाद लिखनी। हर वक्त इस नाशवान् संसार की यात्रा में अपने आपको सत् परायण बनावें। दुःख सुख प्रभु की इच्छा में देखते हुये धीरजवान (धैर्यवान) रहें, यह ही जीवन गुणी पुरुषों का होता है। अभ्यास और सत्संग में अधिक प्रेम रखें। अपना कर्त्तव्य ही सर्व कल्याण के देने वाला होता है। सब समय के हालात एक जैसे नहीं रहते हैं। कुछ न कुछ तबदीली (परिवर्तन) बनी रहती है। इसी का नाम दुनियाँ है। ईश्वर सत् विश्वास देवे। तमाम प्रेमियों को दुबारा आशीर्वाद कहनी। हर वक्त हमको हृदय में देखें। अपने आपको निहायत (अति) श्रद्धावान् बनाकर नाम में दृढ़ होवें। जिन्दगी की खोज ही असली मौज है। ईश्वर गुरु वचन का विश्वास देवे। ईश्वर नित ही रखियक (रक्षक) होवे और गुरु आशीर्वाद अंग संग जानें। ईश्वर सब जनता में धीरज और धर्म देवे। बचन विचार करें।
बन्धन हरे निज पद लेवे, जो गुरु की सीख विचारे।
परम सखा गुन ज्ञान का दाता, एको सत्गुरु नित बलिहारे।।