आशीर्वाद पहुंचे! पत्र मिला, ईश्वर सत श्रद्धा देवें। संगत को आशीर्वाद कहनी। हर वक्त प्रभु चरणों की प्रीति प्राप्त होवे। प्रेमी जी, फकीरी या गृहस्त आश्रम में दाखिल होना अपने दिल की ताकत पर मुनहसर (निर्भर) है। चूंकि आजकल के फकीर गृहस्तियों से बढ़कर विकारी हैं इस वास्ते ऐसी हालत से बेहतर (उत्तम) है कि गृहस्थी होकर सत् धर्म का पालन करे। अगर चित्त में प्रभु चरण की प्रीत होवे तो गृहस्थ आश्रम में जल्दी कामयावी हो सकती है। यह तुम खुद विचार कर लेवें। अपनी ज़िन्दगी को एक नमूना बनावें, न कि नाकारा होकर अपने आप को तबाह कर लेवें। ईश्वर निर्मल बुद्धि देवे। तमाम प्रेमियों को दुबारा आशीर्वाद कहनी। ईश्वर सत् चिन्तन देवे।