आशीर्वाद पहुंचे। पत्र मिला, ईश्वर सत् श्रद्धा देवे। तमाम संगत को एक-एक करके आशीर्वाद कहनी। प्रेमी जी, निगाह दूर की पैदा करें तब पता लगेगा कि समता की तालीम (शिक्षा) रूहानी आज़ादी (आध्यात्मिक स्वतंत्रता) और असली खुशी का सरूप है। और आजकल मादे (भोगों) की आज़ादी जो वास्तव में तबाही का हाल है, उसका अधिक प्रचार हो रहा है। किसी वक्त यह सूरत बदलकर समता के स्वरूप में आ जावेगी। इस वास्ते तुम अपना जीवन बाअमल बनाकर अपने असूल पर कारबन्द रहें। जो कुछ होता है वह प्रभु हुक्म (आज्ञा) से ही होता है। समय पर अक्सर कई गुरमुखों की कुरबानियां (बलिदान) देश को जीवन देती हैं। ईश्वर सत् बुद्धि देवे। तमाम प्रेमियों को आशीर्वाद कहनी। सत्संग में अगर हाजरी कम है तो भी कोई हर्ज नहीं। तुम अपना असूल (नियम) मुकम्मिल (पूर्ण) रखें। ईश्वर की कृपा दृढ़ निश्चय से बाअमल होने से जरूरी होती है। अपनी कुशल पत्रिका लिखते रहा करें। कुछ समय तक एक एकान्त जगह मुकीम (ठहरे) हैं. इस जगह का नाम समयाला है। यह बैजनाथ (जिला कांगड़ा) से छः मील के फासले पर है। साढ़े पांच हजार फुट की बुलन्दी (ऊंचाई) है। तमाम प्रेमी अपनी-अपनी कुशल पत्रिका लिखते रहा करें। ईश्वर सत् विश्वास देवे। और देश के वास्ते एक आलातरीन (बहुत बढ़िया) जीवन बनाने में हर वक्त प्रभु परायणता धारण करें। ईश्वर गुरु बचन का विश्वास देखे।
(समयाला)