Satt Kartavya Palan Ki Prerna (सत् कर्त्तव्य पालन की प्रेरणा)

ईश्वर सत् बुद्धि देवे। प्रेमी जी, हर वक्त अपने आहार, व्यवहार और संगत की पवित्रता रखें। इससे जीवन उन्नति करता है। और अभ्यास भी ज़रूरी किया करें। ईश्वर सत् विश्वास देवे। असली खुशी आत्म परायण होने से है, यानी अपनी खुदी (अहंकार) को अबूर करके (छोड़कर) हर वक्त निर्मान भाव से सर्व हितकारी होकर जीवन को व्यतीत करना। हर वक्त सत् श्रद्धा से अपनी शारीरिक अन्तिम दशा को विचार करते हुये नित्य सत् कर्त्तव्य का पालन करना चाहिये। बाहोश होकर संसार के सही नतीजे को समझते हुए समता के असूलों को दृढ़ करें। दीन व दुनियाँ के वास्ते अपनी ज़िन्दगी रोशनी वाली बनावें। ईश्वर सत् अनुराग देवे। तमाम सदाचारी गुरुमुखों को आशीर्वाद कहनी। हर वक्त हमको हृदय में देखें।

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संगत समतावाद धर्मशाला – हरिद्वार
हिमालय डिपो, गली न.1, श्रवण नाथ नगर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)