Samarpan buddhi se Nirmal Sankalp or nirmal Yatan Prakat hota Hai(समर्पण बुद्धि से निर्मल संकल्प और निर्मल यत्न प्रकट होता है)

सुपुर्दगी यानी समर्पणता और यत्न का यह बल है कि समर्पणता के बल से केवल यथार्थ यत्न ही हृदय से उत्पन्न होता है जोकि जीवन उन्नति का सहायक है, और मलीन वासनाओं का अभाव हो जाता है।
समर्पण बुद्धि के बगैर जो भी यत्न किया जाता है वह बन्धन दर बन्धन और वास्तविक अशान्ति के देने वाला होता है यानी समर्पण बुद्धि से निर्मल संकल्प और निर्मल यत्न प्रगट होता है जोकि परम सुख का स्वरूप है। समर्पण बुद्धि की दृढ़ता शुद्ध प्रयत्न को प्रकाशने वाली है और नित स्वरूप आत्मा के आनन्द में स्थिति के देने वाली है। सत्पुरुषों का प्रथम सार साधन समर्पण बुद्धि की दृढ़ता ही है।

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संगत समतावाद धर्मशाला – हरिद्वार
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