Propkari Jeevan Tatha Aapas Mein Prem Hetu Prerna(परोपकारी जीवन तथा आपस में प्रेम हेतु प्रेरणा)

आज्ञाकारी सती सेवक रतन चंद जी व तमाम समता समाज दौरांगला !
आशीर्वाद पहुँचे। ईश्वर आज्ञा से आज काला पहुँच गए हैं। कल इस जगह से रवाना हो जायेंगे, क्योकि उस जगह से प्रेमी लेने के वास्ते आज पहुँच गया है। आइंदा जो पत्रिका आवे मार्फत (द्वारा) सरदार तुलसासिंह बमकाम (गांव) जंड महलू, तेहसील गुज़रखान, जिला रावलपिंडी के घर देनी। प्रेमी जी! तमाम संगत को एक-एक करके आशीर्वाद कहनी। ईश्वर सबको सत्संग प्रीति बख्शे। हमको दूर न समझें, बल्कि अपने हृदय में हर वक्त समता के भाव को धारण करते रहें। दुनियाँ में परहित और परोपकार ही जीवन है। सो तुम तमाम प्रेमी सच्चे दिल से जगत सेवक बनने की कोशिश करते रहें। गुरु का आशीर्वाद तभी प्रफुल्लित होता है कि उनका बचन तन मन करके पालन करें। तुम्हारे जैसे सुपुत्र देश सेवा का भाव रखने वाले और हरेक के साथ सच्ची प्रीति रखने वाले, खोजते खोजते तुम्हारे दौरांगला पहुँचे जिससे कुछ प्रेमियों को हासिल पाया। कृपा करके अपने मन में जगह देनी और हर वक्त सत् वचन धारण करने की कोशिश करते रहना। सत्संग के हालात लिखते रहें। हमारी प्रसन्नता तभी हो सकती है जब तुम प्रेमी सच्चे अधिकारी के स्वरूप में देखने में आओगे। प्रेमी जी! तुम लोग बहुत खुशनसीब हो, जिससे उस उस्ताद की नज़र के नीचे आए हो जिसके अंदर ईश्वर ने आकर खुद आगाही (प्रेरणा) तुम्हारी सेवा के वास्ते की। हर वक्त यह विश्वास धारण करें। किसी वक्त तुमको यह पता लगेगा कि हमारे रहबर (गुरु) का जीवन कैसा है। ईश्वर तुमको श्रद्धा देवें। तमाम संगत दोरांगला को दोबारा एक एक करके आशीर्वाद कहनी मुताबिक सन्मुख के (जैसा कि सामने बैठकर) ईश्वर सबको सत्सेवा और मानुष जन्म की सफलता देवे और समता बुद्धि बख्शे। ईश्वर का निश्चय धारण करते रहें। यही परम खुशी है। प्रेमी दौलतराम, ज्ञानचंद, ओमप्रकाश, बैजनाथ, छज्जूराम,करम चंद, अमरनाथ व रत्न चंद तुम्हारे वास्ते खास हिदायत (शिक्षाएँ) यह हैं, इन पर पूरा अमल करना :-
1. हर एक प्रेमी अपनी कुशल पत्रिका अलैहदा-2 (अलग-अलग) लिखा करें।
2. अभ्यास ज़रूरी किया करें।
3. सत्संग का नियम प्रकाश करने का यत्न करें।
4. समता की रोशनी को धारण करना और लोगों को आगाह (प्रेरणा) करना तुम्हारा पहला फर्ज है।
5. जो प्रश्न होवे पत्रिका द्वारा पूछ लिया करें।
6. तुम्हारा आपस में जीवन ऐसा होवे जैसे पानी और मछली।
7. हर एक प्रेमी सत् नियमों को धारण करने का पूरा यत्न करे।
8. ख्वाहे (चाहे) कुछ भी होवे तुम समता धर्म के पालन करने वाले बनें।
9. अपनी ज़िन्दगी को एक नमूना बनाकर दिखाएँ।
10. तुम खुशकिस्मत भी हो और बदकिस्मत भी हो। खुशकिस्मत इस वास्ते हो कि सही उस्ताद की पनाह (सच्चे गुरु की शरण) में आए हो। बद किस्मत इस वास्ते हो कि तुम्हारा इम्तहान हर वक्त नए से नया होगा। ईश्वर तुमको सामर्थ्य देवे। तमाम नौजवान, वृद्ध माताओं और बच्चों सबको आशीर्वाद कहनी एक एक करके। प्रेमी बंसीलाल, त्रिलोकनाथ, मनीराम दीगर (शेष) प्रेमियों के नाम हमें याद नहीं, बल्कि श्रद्धा याद है। इस वास्ते उनको आशीर्वाद कहनी। और कभी-कभी पत्रिका द्वारा जरूरी दर्शन दिया करें। ईश्वर लोकसेवा और सत्संग प्रीति बख्शे। वापसी जवाब देना। ईश्वर तुमको श्रद्धा देवे।
आज्ञाकारी पंडित गौर प्रसाद जी !
आशीर्वाद पहुँचे। ईश्वर आपको सेवा भाव अधिक देवें। कभी कभी पत्रिका द्वारा आनन्दित भी किया करें। अपनी बहिन जी को आशीर्वाद कहनी। दूसरी माताओं को भी आशीर्वाद कहनी। तमाम कुन्बा (परिवार) को आशीर्वाद पहुँचे। रतनचंद जी, यह पत्रिका सुनाकर हर एक को अपना अपना फर्ज जतला देना। वापसी पत्र भी लिखना।
(मंगतराम अज़ जंड महलवां डाकखाना ऐजान)
मार्फत सरदार तुलसासिंह,
तहसील गुजरखौ
जिला रावलपिंडी (पाकिस्तान)

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संगत समतावाद धर्मशाला – हरिद्वार
हिमालय डिपो, गली न.1, श्रवण नाथ नगर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)