Guru Aagya Ko Apnana hi Guru Bhakti hai(गुरु आज्ञा को अपनाना ही गुरु भक्ति है)

ईश्वर सत् श्रद्धा देवे। ईश्वर आज्ञा से काला में स्थित हैं। अभी कोई मौजू (अनुकूल) जगह नहीं मिली। देखिये नारायण को क्या आज्ञा होती है। प्रेमी जी, हर वक्त हमको हृदय में समझें। प्रभु आज्ञा से डेढ़ माह से जो अलील (नाजुक) हालत में रावलपिंडी ठहरे हैं और प्रेमियों ने अपनी सत् श्रद्धा से हर एक किस्म की सेवा की है प्रभु इसकी सफलता देवें और निर्मान भाव बख्शें। वह ही बड़ा खुशनसीब होता है जिसको जीवन में कुछ सेवा का मौका मिलता है। प्रेमी जी, हर वक्त अपने चित्त में निर्मल उपकार धारण करें। इसी में कल्याण है। तमाम प्रेमियों को वाजय (सूचित) होवे कि अपनी सच्ची कुरबानी से समता के मार्ग पर चलकर असली शान्ति हासिल करें, जो मानुष जीवन का सार है। तुम्हारा पवित्र जीवन और कुरबानी का जज़्बा हर वक्त चाहते हैं। ईश्वर समर्थ देवे। अपनी कुशल पत्रका द्वारा आशीर्वाद तलब (हासिल) करते रहें। बड़ी जरूरत है इस वक्त उपकारी जीवन की। तुम प्रेमियों को अपनी जिन्दगी सुफल करनी चाहिए। हर वक्त यह भाव चित्त में दृढ़ करें। गुरु हुक्म को अपनाना ही असली गुरु भक्ति है। सत्संग का प्रोग्राम दृढ़ करें। अभी प्रेमियों के अन्दर असली धर्म के जज़्बात कम हैं इस वास्ते अगर तुम अपनी कल्याण चाहो तो पूरन निश्चय से समता के असूलों पर कारबन्द (अमल करना) हो जाओ फिर देखो क्या खुशी चित्त को प्राप्त होती है। तुमको वाज़य (सूचित) होवे कि जितना लिट्रेचर तुम्हारे को हासिल हुआ है इसको सही तरीका से मुताल्या (अध्ययन) करके अमल में लावें और दूसरों के वास्ते आदर्श सरूप बनें। अभी तुम्हारे बड़े इम्तिहान होने हैं। इस वास्ते हर वक्त मार्ग धर्म में दृढ़ता हासिल करें। प्रभु सत् विश्वास देवे। सत्संग की कमजोरी को दूर करें और अपने जीवन को नित ही पवित्र करें। तमाम प्रेमियों को एक-एक करके आशीर्वाद कहनी। ईश्वर सत् अनुराग देवें।

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संगत समतावाद धर्मशाला – हरिद्वार
हिमालय डिपो, गली न.1, श्रवण नाथ नगर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)