प्रेमी कांता प्रसाद जी

“बिना प्रभ सिमरे नहीं धीरा ।।”

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प्रेमी कांता प्रसाद जी

पुण्य तिथि : 13 अक्टूबर 2007

सीतल मत नहीं त्यागिये , जो क्रोध भुजावे आग ।
आठ पहर समता रहे ,प्रेम हरी रास लाग ।।

सतगुरुदेव महात्मा मंगतराम जी द्वारा दीक्षित प्रेमी कांता प्रसाद जी (दिल्ली निवासी) की आज पुण्यतिथि है। कम आयु में ही आपने सच्चे संस्कारों को अपनाया और जीवनपर्यंत संगत सेवा में लगे रहे। सतगुरुदेव जी का अनमोल सानिध्य प्राप्त हुआ और उनकी अपरम अपार कृपा से कम आयु में ही आपको दीक्षा भी प्राप्त हुई।

आपने जगाधरी आश्रम से गहरा जुड़ाव रखते हुए, साप्ताहिक, मासिक व वार्षिक समता सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई। आप सदैव संगत सेवा में तत्पर रहते थे।

आपका जीवन निष्काम सेवा, विनम्रता, त्याग और समर्पण की मिसाल रहा है। आज भी आपके सुपुत्र प्रेमी सुमेर चंद जी व परिवार के सभी सदस्य आध्यात्मिक एवं समता शिक्षा में रुचि रखते हैं और निष्काम भाव से संगत सेवा में समर्पित हैं।

आज आपकी पुण्यतिथि पर हम सब आपको याद कर, आपकी अटूट सेवा को शत शत नमन करते हैं और सतगुरदेव जी से सत विश्वास, स ईश्वर प्रेम प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं ताकि हम सब भी सेवा रूपी अमोलक धन को अपने जीवन में एकत्रित करने का भरपूर प्रयास कर सकें।

श्री सतगुरुदेव जी के आशीर्वाद से संगत समतावाद ट्रस्ट, हरिद्वार के सभी सदस्य बजुर्गों के सच्चे जीवन से इसी प्रकार प्रेरणा लेते रहेंगे और उनके त्याग, सेवा और आस्था को शत् शत् नमन करते हुए भविष्य में भी यह श्रद्धांजलि सेवा कार्य सतगुरुदेव जी के आशीर्वाद से जारी रखेंगें ।

ॐ ब्रह्म सत्यम सर्वाधार

Note:
उपरोक्त लेख में दास से अवश्य ही गलतियां हो गयी होंगी जिसके लिए दास क्षमा प्रार्थी है और सुझावों का स्वागत करता है। उपरोक्त लेख की अधिकांश जानकारी आदरणीय प्रेमी जी के परिवार से ली गयी है।
ॐ ब्रह्म सत्यम सर्वाधार

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